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Adhyatmvishayak Patra By Jayadayal Goyandka | अध्यात्मविषयक पत्र
परम श्रद्धेय श्री जयदयाल गोयन्दका जी के दिव्य पत्रों और आध्यात्मिक उपदेशों का एक अनमोल संग्रह। (A compilation of insightful spiritual letters and profound guidance on inner peace and devotion by the founder of Gita Press.)
₹20.00
गीता प्रेस, गोरखपुर के संस्थापक परम श्रद्धेय श्री जयदयाल गोयन्दका जी (पोद्दार जी) द्वारा लिखित "अध्यात्मविषयक पत्र" साधना मार्ग पर चलने वाले प्रत्येक जिज्ञासु के लिए एक साक्षात् पथ-प्रदर्शक है। इस पुस्तक में उन दिव्य और वैचारिक पत्रों का संकलन है, जो समय-समय पर देश-विदेश के साधकों, गृहस्थों और मुमुक्षुओं की शंकाओं के समाधान के लिए लिखे गए थे।
यह पुस्तक कठिन से कठिन आध्यात्मिक और दार्शनिक प्रश्नों को अत्यंत सरल, व्यावहारिक और सीधे हृदय में उतर जाने वाली शैली में समझाती है। गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी ईश्वर प्राप्ति और मानसिक शांति कैसे पाई जा सकती है, इसका इसमें अचूक मार्गदर्शन है।
इस पावन पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ:
व्यावहारिक शंका-समाधान: ध्यान, नाम-जप, सदाचार और कर्मयोग से जुड़े साधकों के व्यावहारिक प्रश्नों का प्रामाणिक उत्तर।
सरल एवं सुबोध भाषा: गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को बेहद सरल हिंदी में प्रस्तुत किया गया है, ताकि हर पाठक इससे लाभ उठा सके।
संस्कार और आत्मिक उन्नति: यह ग्रंथ मन के विकारों (क्रोध, मोह, लोभ) को दूर कर जीवन में पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
स्वाध्याय के लिए सर्वोत्तम: दैनिक रूप से पढ़ने, आध्यात्मिक जागृति पाने और अपने प्रियजनों को सही मार्ग दिखाने के लिए यह एक अनिवार्य पुस्तक है।
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