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Amrataki Aur By Swami Ramsukhdas Ji Maharaj | अमरताकी ओर (Gita Press)

परम पूज्य स्वामी रामसुखदास जी महाराज द्वारा निर्देशित अमरता, आत्मज्ञान और शाश्वत शांति का पावन मार्ग। (An enlightening spiritual guide by Gita Press, directing seekers away from transient worldly bindings and towards the path of immortality.)

₹20.00

गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित "अमृता की ओर" अध्यात्म मार्ग के जिज्ञासुओं और साधकों के लिए एक अत्यंत मूल्यवान और मार्गदर्शक लघु ग्रंथ है। इस पुस्तक में परम पूज्य श्रद्धेय स्वामी रामसुखदास जी महाराज ने मनुष्य को इस नश्वर (मिटने वाले) संसार के बंधनों से ऊपर उठकर उस अविनाशी, परम तत्त्व परमात्मा को प्राप्त करने का अत्यंत सुगम उपाय बताया है, जिसे शास्त्रों में 'अमृत' या 'अमरता' कहा गया है।

स्वामी जी महाराज की शैली की यह विशेषता है कि वे बिना किसी क्लिष्टता के, बहुत ही व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से मन के भटकाव को शांत करने और उसे अंतर्मुखी करने की कला सिखाते हैं।

इस पावन पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ:

  • अमरता और सत्य की खोज: यह पुस्तक गहराई से बोध कराती है कि शरीर नश्वर है परंतु आत्मा अमर है; और इस सत्य को जीवन में कैसे अनुभव किया जाए।

  • मोह और आसक्ति से मुक्ति: व्यावहारिक जीवन में रहते हुए परिवार और कर्तव्यों का पालन करते हुए भी अनासक्त (Detached) कैसे रहें, इसका सुंदर विवेचन।

  • सरल एवं सुबोध शैली: स्वामी जी के प्रवचनों का वह दिव्य निचोड़ जिसे एक साधारण गृहस्थ भी सुगमता से समझकर अपने दैनिक जीवन में उतार सकता है।

  • स्वाध्याय के लिए सर्वोत्तम: आत्मिक शांति, मानसिक तनाव से मुक्ति और नियमित रूप से सुबह या रात को स्वाध्याय करने के लिए एक अनिवार्य प्रेरणादायी पुस्तक।