Chandogya Upanishad Sanskrit-Hindi | छान्दोग्योपनिषद् (सटीक एवं प्रामाणिक )

सामवेदीय परंपरा का सबसे विशाल और पावन उपनिषद; मूल संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, अन्वय और पूज्य पाद श्रीशंकराचार्य जी के भाष्य के मर्म को समझाती सरल हिंदी व्याख्या। (The sacred and highly comprehensive edition of Chandogya Upanishad by Gita Press,

₹170.00

गीता प्रेस, गोरखपुर (Gita Press Gorakhpur) द्वारा प्रकाशित "छान्दोग्योपनिषद्" (Chandogya Upanishad Hindi Book) सनातन धर्म, वेदान्त दर्शन और उपनिषद साहित्य का एक परम पावन, अत्यंत प्राचीन और जाग्रत महाग्रंथ है। यह उपनिषद सामवेद की कौथुम शाखा के छान्दोग्य ब्राह्मण का एक मुख्य भाग है। आकार और महत्ता की दृष्टि से बृहदारण्यक उपनिषद के बाद इसे सनातन संस्कृति का दूसरा सबसे विशाल और महत्वपूर्ण उपनिषद माना जाता है, जिसमें आत्मज्ञान, ब्रह्मतत्त्व और साधना के रहस्यों का अगाध समुद्र समाया हुआ है।

आज के इस आधुनिक, अत्यधिक अशांत और मानसिक भटकाव वाले युग में, जहाँ मनुष्य शांति और जीवन के वास्तविक उद्देश्य की तलाश में भटक रहा है, यह महाग्रंथ स्वयं को जानने (Self-Realization) और परम आनंद प्राप्त करने का साक्षात् प्रकाश-स्तंभ है। गीता प्रेस की प्रामाणिकता के अनुसार, इसके गंभीर और गूढ़ रहस्यों को अत्यंत सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी भाषा में प्रस्तुत किया गया है। इसमें मूल संस्कृत मंत्रों के साथ पदच्छेद (Word Separation), अन्वय (Sentence Order) और सटीक अनुवाद दिया गया है, ताकि साधारण पाठक, शोधार्थी (Scholars) और आज की युवा पीढ़ी भी ऋषियों की दिव्य चेतना को आसानी से आत्मसात कर सके।

🔑 पुस्तक के मुख्य विषय और आध्यात्मिक लाभ (Core Highlights):

  • 'तत्त्वमसि' (Tat Tvam Asi) महावाक्य का प्रतिपादन: इस उपनिषद के छठे अध्याय में आरुणि ऋषि द्वारा अपने पुत्र श्वेतकेतु को दिया गया वह अमर उपदेश है, जिसमें प्रसिद्ध महावाक्य "तत्त्वमसि" (वह ब्रह्म तुम ही हो) के माध्यम से जीव और ब्रह्म की एकता का अद्भुत प्रतिपादन किया गया है।

  • पवित्र 'ॐ' (OM) कार और उद्गीथ उपासना: सृष्टि के आदि नाद पवित्र 'ॐ' की वैज्ञानिक व दार्शनिक व्याख्या, तथा मन को एकाग्र करने के लिए उद्गीथ उपासना का सुंदर मार्गदर्शन।

  • महान ऋषियों के दिव्य संवाद: इसमें राजा जनक, सत्यकाम जाबाल, नारद-सनत्कुमार संवाद और प्रजापति-इन्द्र-विरोचन जैसे अनेक प्रेरक व ऐतिहासिक दार्शनिक संवाद शामिल हैं, जो आत्मा के वास्तविक स्वरूप को उजागर करते हैं।

  • शाण्डिल्य विद्या और दहर विद्या का समावेश: हृदय आकाश में ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव कराने वाली प्राचीन ध्यान विधियों (Meditative Techniques) का शास्त्रीय विवेचन।

  • उच्च गुणवत्तापूर्ण मुद्रण: पुस्तक को बहुत ही सुंदर, आकर्षक और मजबूत कवर के साथ स्पष्ट बड़े अक्षरों (Bold Typography) में मुद्रित किया गया है, जिससे नित्य नियम से स्वाध्याय (Daily Reading) करते समय आँखों पर बिल्कुल जोर नहीं पड़ता।

🎯 यह पुस्तक आपके स्टोर और पुस्तकालय के लिए क्यों अनिवार्य है?

  • सर्वोत्तम आध्यात्मिक उपहार (Spiritual Gifting): किसी भी विशेष मांगलिक अवसर, यज्ञ-अनुष्ठान, ज्ञान-यज्ञ, जन्मदिन, गृह-प्रवेश या पूजनीय माता-पिता व ज्ञानपिपासु मित्रों के स्वाध्याय के लिए इससे कल्याणकारी, मूल्यवान और अर्थपूर्ण उपहार दूसरा कोई नहीं हो सकता।

यदि आप वेदों के वास्तविक ज्ञान-अमृत का रसास्वादन करना चाहते हैं, जीवन और मृत्यु के रहस्यों से परे शाश्वत सत्य को जानना चाहते हैं, तो "छान्दोग्योपनिषद् (Sanskrit-Hindi Edition)" को आज ही अपने घर, पूजा-घर और व्यक्तिगत पुस्तकालय (Personal Library) का सर्वोच्च गौरव अवश्य बनाएं।


Keywords: Chandogya Upanishad Sanskrit Hindi, Chandogya Upanishad Gita Press, Upanishad Books Online India, Gita Press Gorakhpur Books Online, Tat Tvam Asi Shloka Hindi Meaning, Advaita Vedanta Philosophy Books, छान्दोग्य उपनिषद गीताप्रेस, उपनिषद हिंदी व्याख्या, गीताप्रेस गोरखपुर धार्मिक पुस्तकें, Krishna Bhakti Store Books, Best Spiritual Books for Self Realization, Sanatan Dharma Sacred Scriptures.


🚚 डिलीवरी और रिटर्न संबंधी त्वरित जानकारी (Quick Store Info)

  • सुरक्षित एवं तीव्र डिलीवरी: आपके द्वारा ऑर्डर सबमिट करने के बाद इस पावन महाग्रंथ को 5 से 7 दिनों (5-7 Days) के भीतर आपके दिए गए पते पर पूरी सुरक्षा और उत्तम पैकिंग के साथ डिलीवर कर दिया जाएगा।

  • 7 दिनों की आसान वापसी (7 Days Return Policy): यदि पुस्तक में मुद्रण (Printing) की कोई त्रुटि पाई जाती है, पन्ने फटे होते हैं या पार्सल को कोई क्षति पहुँचती है, तो आप डिलीवरी के 7 दिनों के भीतर इसे बिना किसी परेशानी के वापस या एक्सचेंज कर सकते हैं।