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Dharmashastra Ank Book by gita press धर्मशास्त्र अंक
kalyan ank gita press dharmashashtra ank धर्मशास्त्र अंक कल्याण गीता प्रेस
₹200.00
गीता प्रेस की 'कल्याण' से प्रेरित यह "धर्मशास्त्र अंक" मानव जीवन को सही दिशा दिखाने वाले सनातन नियमों, कर्तव्यों और नैतिक मूल्यों का एक अमूल्य संग्रह है।
इस विशेषांक में वेदों, पुराणों, स्मृतियों और पूज्य संतों के विचारों का सार समाहित किया गया है। इसमें संकलित लेख और कथाएँ पाठकों को केवल धार्मिक ज्ञान ही नहीं देतीं, बल्कि आज के आधुनिक युग में एक आदर्श और संतुलित जीवन जीने की व्यावहारिक सीख भी प्रदान करती हैं।
इस अंक की मुख्य विशेषताएँ:
सदाचार और कर्तव्य: माता-पिता, समाज और राष्ट्र के प्रति हमारे धर्म (कर्तव्यों) का सरल विश्लेषण।
नैतिक एवं आध्यात्मिक प्रेरणा: जीवन में सत्य, अहिंसा, दया, और त्याग जैसे सद्गुणों को अपनाने की प्रेरणादायक कथाएँ।
चरित्र निर्माण: बच्चों और युवाओं में सही संस्कारों के सिंचन के लिए विशेष मार्गदर्शिका।
सरल और सुबोध भाषा: क्लिष्ट धार्मिक सिद्धांतों को भी आम पाठकों के लिए बेहद सरल और सरस रूप में प्रस्तुत किया गया है।
यह अंक हर उस पाठक के लिए एक संग्रहणीय ग्रंथ है जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना चाहता है और आत्मिक उन्नति के मार्ग पर अग्रसर है।
मुख्य प्रेरणा और आदि संपादक (Editorial Pillars)
भाईजी श्री हनुमानप्रसाद जी पोद्दार: कल्याण पत्रिका के आदि संपादक, जिनकी देखरेख और प्रेरणा से गीता प्रेस के इन ऐतिहासिक विशेषांकों की नींव रखी गई।
श्री जयदयाल जी गोयन्दका: गीता प्रेस के संस्थापक, जिनके आध्यात्मिक विचार और लेख इस अंक के सैद्धांतिक आधार हैं।
श्री राधेश्याम जी खेमका: जिन्होंने कल्याण के अनेक विशिष्ट अंकों के संपादन और पुनरीक्षण में मुख्य भूमिका निभाई।
2. विशिष्ट लेखक और विद्वान (Eminent Contributors)
इस अंक में धर्मशास्त्रों (वेदों, स्मृतियों, पुराणों) के गूढ़ नियमों को सरल भाषा में समझाने के लिए देश के प्रसिद्ध मनीषियों के लेख शामिल हैं:
विभिन्न पीठों के पूज्य शंकराचार्य जी और महामंडलेश्वर।
काशी और मिथिला के प्रकांड पंडित व संस्कृत विद्वान: जिन्होंने मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति, पराशर स्मृति आदि ग्रंथों के आचार, विचार, और प्रायश्चित खंडों पर प्रामाणिक लेख लिखे हैं।
सनातन धर्म के शीर्ष संत और विचारक: जिनके व्यावहारिक उपदेश मानव कर्तव्य (धर्म) को स्पष्ट करते हैं।
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