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Geeta Darpan By Swami Ramsukhdas Ji Maharaj | गीता-दर्पण
श्रीमद्भगवद्गीता के व्यावहारिक और आध्यात्मिक रहस्यों को समझाने वाला एक अत्यंत सुबोध एवं मार्गदर्शक ग्रंथ। (A reflective and insightful commentary on the Bhagavad Gita by Swami Ramsukhdasji, making ancient wisdom accessible for modern life.)
₹140.00
गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित "गीता-दर्पण" महाभारत के महायुद्ध में भगवान श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए अमर संदेश 'श्रीमद्भगवद्गीता' पर आधारित एक अत्यंत अनमोल टीका है। इसके रचयिता अध्यात्म जगत के मूर्धन्य महापुरुष परम पूज्य स्वामी रामसुखदास जी महाराज हैं।
यह पुस्तक केवल गीता के श्लोकों का अनुवाद नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के दर्पण की तरह है। स्वामी जी ने इसमें बहुत ही सरल, व्यावहारिक और सीधे हृदय में उतर जाने वाले उदाहरणों के माध्यम से समझाया है कि एक साधारण गृहस्थ व्यक्ति भी अपने दैनिक कर्तव्यों का पालन करते हुए कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग के द्वारा परम शांति और परमात्मा को कैसे प्राप्त कर सकता है।
इस पावन ग्रंथ की मुख्य विशेषताएँ:
सरल और व्यावहारिक विवेचन: गीता के क्लिष्ट और दार्शनिक सिद्धांतों को बेहद आसान भाषा में समझाया गया है, जिसे हर आयु वर्ग के पाठक आसानी से समझ सकते हैं।
साधना और मन की शांति: दैनिक जीवन के तनाव, अवसाद (Depression) और दुविधाओं से मुक्ति पाकर मन को शांत और स्थिर करने के अचूक दिव्य सूत्र।
शंका-समाधान: साधना मार्ग पर चलने वाले जिज्ञासुओं और साधकों के मन में उठने वाले व्यावहारिक प्रश्नों का स्वामी जी की दिव्य वाणी द्वारा तार्किक निवारण।
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