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Manushya Ka Param Kartavya Part 1 By Jayadayal Goyandka | मनुष्य का परम कर्तव्य - भाग 1
Gita Press Gorakhpur Hindi Book |Manushya Ka Param Kartavya Part 1
₹25.00
क्या आप मानव जीवन के असली उद्देश्य और अपने वास्तविक कर्तव्यों को समझना चाहते हैं?
Manushya Ka Param Kartavya - Part 1 (मनुष्य का परम कर्तव्य - भाग 1) सनातन धर्म के अनन्य सेवक और गीताप्रेस के संस्थापक परम श्रद्धेय श्री जयदयाल गोयन्दका जी द्वारा लिखित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जीवनोपयोगी ग्रंथ है। गीताप्रेस गोरखपुर (Gita Press, Gorakhpur) द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में बहुत ही सरल और व्यावहारिक रूप से समझाया गया है कि इस संसार में रहते हुए एक मनुष्य का सर्वोच्च कर्तव्य क्या है।
📖 (Key Highlights):
लेखक (Author): श्री जयदयाल गोयन्दका जी (Jayadayal Goyandka)
प्रकाशक (Publisher): गीताप्रेस गोरखपुर (Gita Press, Gorakhpur)
भाषा (Language): सरल, सुबोध और प्रभावमयी हिंदी (Hindi)
विषय (Topic): मानव धर्म, सदाचार, निष्काम कर्म योग, और ईश्वर-प्राप्ति का मार्ग।
परम कर्तव्य का बोध: इस दुर्लभ मनुष्य शरीर को पाकर हमें कौन से ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे हमारा इहलोक और परलोक दोनों सुधर सकें।
नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति: दैनिक जीवन में सत्य, दया, संतोष और सदाचार का पालन करते हुए मानसिक शांति कैसे प्राप्त करें।
व्यवहार और परमार्थ का संतुलन: परिवार और समाज की जिम्मेदारियों को निभाते हुए भगवान की भक्ति में मन कैसे लगाएं।

Manushya Ka Paramakartavya (Part I) (Hindi)
About the Book
AuthorShri Jayadayal Ji Goyandka
LanguageHindi
Number of Pages192
Book SizePustakakar (13.5cm*20.32cm)
Description
ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय श्री जयदयाल जी गोयन्दका के द्वारा प्रणीत इस पुस्तक में भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, संयम, वर्णाश्रम-धर्म, सत्य, श्रद्धा, समता, भगवत्प्रेम, प्रारब्ध और पुरुषार्थ आदि आध्यात्मिक विषयों पर सुन्दर विवेचन किया गया है।
Shri Jayadayal Ji Goyendka
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