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Shri Bhakti Rasamrta Sindhu Book | श्री भक्ति-रसामृत-सिंधु - Srila Rupa Goswami
The Complete Science of Devotion & Divine Rasa | सनातन भक्ति और रस-विज्ञान का सबसे महान ग्रंथ
₹560.00
गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय का प्राण — शुद्ध भक्ति और भगवद-रस का अलौकिक महासागर!
Shri Bhakti-Rasamrta-Sindhu (श्री भक्ति-रसामृत-सिंधु) भक्ति काल के महान आचार्य और चैतन्य महाप्रभु के परम शिष्य श्रीमद् रूप गोस्वामी जी महाराज द्वारा रचित एक सर्वोपरि ग्रंथ है। 'भक्ति-रसामृत-सिंधु' का शाब्दिक अर्थ है—भक्ति के अमृतमयी रस का समुद्र। यह पुस्तक वैष्णव दर्शन में भक्ति को एक भावुक भावना से ऊपर उठाकर एक पूर्ण विज्ञान (Science of Devotion) के रूप में स्थापित करती है।
यदि आप केवल सतही पूजा-पाठ से आगे बढ़कर भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य और निस्वार्थ प्रेम-भक्ति (Pure Devotional Service) की गहराई, उसके विभिन्न स्तरों और दिव्य रसों को प्रामाणिक रूप से समझना चाहते हैं, तो यह ग्रंथ आपके स्वाध्याय के लिए अनिवार्य है।
🌟 ग्रंथ की मुख्य विशेषताएं और वास्तविक ज्ञान (Core Knowledge for SEO):
भक्ति के चारों विभागों का विस्तृत वर्णन: इस ग्रंथ को चार मुख्य भागों (पूर्व, दक्षिण, पश्चिम और उत्तर विभाग) में बांटा गया है, जिसमें साधन-भक्ति, भाव-भक्ति और प्रेम-भक्ति के गुप्त रहस्यों को उजागर किया गया है।
5 मुख्य और 7 गौण रसों का विज्ञान: श्री रूप गोस्वामी जी ने इसमें शांत, दास्य, सख्य, वात्सल्य और मधुर रस (conjugal love) जैसी मुख्य दिव्य अवस्थाओं को शास्त्रों के प्रमाणों के साथ बहुत ही तार्किक रूप से समझाया है।
सरल हिंदी अनुवाद एवं टीका (Easy Hindi Translation): मूल संस्कृत श्लोकों के गूढ़ आध्यात्मिक अर्थों को बहुत ही सरल, सुबोध और मर्मस्पर्शी हिंदी व्याख्या के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि आम पाठक भी रस-तत्त्व को समझ सके।
Premium Quality Edition: यह पुस्तक साफ़ बड़े अक्षरों (Clear Typography), त्रुटिहीन प्रामाणिकता और मजबूत बाइंडिंग के साथ आती है, जो आपके घर के मंदिर और पर्सनल लाइब्रेरी के लिए एकदम उत्तम है।
📖 यह पावन ग्रंथ आपके पास क्यों होना चाहिए?
For Sincere Krishna Devotees: जो चैतन्य महाप्रभु की विचारधारा, ब्रज-रस और रागानुगा भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं और नाम-जप में दिव्य आनंद की अनुभूति करना चाहते हैं।
Daily Swadhyay & Spiritual Growth: रोज इसके अध्यायों का पाठ करने से हृदय के अनर्थ (काम, क्रोध, मोह) दूर होते हैं और मन में सीधे ठाकुर जी के चरणों के प्रति अटूट प्रेम जाग्रत होता है।
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